Dr. Pradeep Kumwat

Dr. Pradeep Kumwat

Thursday, 30 January 2014

Today Morning SMS

Lakshya tak Pahuchna Sukhad hai
Kintu lakshya tak ki gai yatra hi
Sarwadhik Mahatvpurn hai jo Aapko 
Anubhavo se bhar deti Hai.
|| Enjoy the Journey not destination only.... The Journey called LIFE ||

SMS of the Evening

|| Shaam Ke Suraj ko Salaam
Jaati Kiran ke Ahsaas ko Salaam
Yuhi Doud dhoop me
Uljhi Zindgi
Bikhri yaado ko Salaam
Kaha koi Suraj dooba
fir na aane ko
Jaati hui us rooh ko salaam
Sajde me Zhuke sar Sada
Na Zhuk ka bhi Rahe Ibadat me
Us Dil ko Salaam
Aao kuch deirus raah pe moun
Beth Jaye
Jaha Antim Bol tha hey Ram
Usi Mahan Aatma
Gandhi Ko Salaam ||

Wednesday, 29 January 2014

Thrusdey SMS Quote [Vyakti Ka Charitra]

Vyakti ka Charitra or Kuch Nahi
Uske Vicharo ka Vistaar Mantra Hai....
So Vichar Sahi to Hum Sahi.

|| Jai Shree Krishna ||



Tuesday, 28 January 2014

Daily SMS Quote [SUKH DUKH]

 
SUKH DUKH samey Kritwa, 
Hani Labho Jaya Jayo, 
Mahaan Wahi hai jo SUKH me 
DUKH me hani labh me Samman Bhav se 
Sweekar Karta hai, 
Yahi Shrest Manvia gun bhi hai.


Monday, 27 January 2014

Swarg Ki Sahitiyik Yatra [Editorial ]

डॉ. प्रदीप कुमावत
मैं रोटेरियन बोल रहा हूँ........

गत दिनों रात को स्वर्गलोक जाने का अवसर प्राप्त हुआ। वहाँ जाकर मुझे गेट पर रोक दिया। आप स्वर्ग में नहीं जा सकते। लेकिन आप यहाँ तक पहुँचे कैसे? क्योंकि यहाँ तक आना भी मुश्किल है। बड़ी मान-मनुहार के बाद उसने स्वर्गलोक के राजा इन्द्र से बात करने केलिए वह बड़ी मुश्किल से तैयार हुआ। उसने फोन कनेक्ट करके मुझसे कहा कि लीजिए आप महाराजाधिराज, स्वर्गाधिप​ित इन्द्रदेव से बात करें। इन्द्रदेव ने मुझसे पूछा कि आप कौन बोल रहे हैं तो मैंने कहा मैं रोटेरियन बोल रहा हूँ। इन्द्र ने बड़ी मुस्कान भरी। पहले यह बताओ तुम इस दरवाजे तक कैसे पहुँच पाए हो। क्योंकि इससे पहले आज तक कोई व्यक्ति सीधे स्वर्ग के दरवाजे तक नहीं आया यहाँ आने से पहले सात दरवाजों को परीक्षा से पार करना होता है। तुम ये सात दरवाजे कैसे पार कर गए इसका आंकलन मुझे करना पड़ेगा।

पहला इन्द्र ने अपने सारे यन्त्रों को खोजकर अपनी टी.वी. स्क्रीन पर यह जानने की कोशिश की कि इन सात दरवाजों को पार कर यह रोटेरियन यहाँ तक कैसे पहुँच गया? जब पहले दरवाजे पर रोका गया तब उसके पाप और पुण्य के बहीखातों को देखकर यह लगा कि ये रोटेरियन साथी हैं जिन्होंने कभी कहीं न कहीं किसी न किसी पोलियो बूथ पर जाकर कुछ बच्चों को पोलियो की ड्रोप्स दी थी। अत: उन बच्चों को दी गई दवा की वजह से इनके खाते में कुछ पुण्य जुड़ गया। इन्द्र ने स्वीकार किया कि तब यह पहला दरवाजा पार करने के लायक है। लेकिन दूसरा दरवाजा कैसे पार किया?

दूसरा दरवाजे पर जब देखा कि यह दरवाजा अपने आप कैसे खुला और अपने आप कैसे पार हो गया? तब पता चला कि जो अनपढ़ हैं, बेसहारा हैं, जो साक्षर नहीं हैं उनकी सहायता कर साक्षरता अभियान में इन रोटेरियन साथी ने बहुत सहयोग किया। अत: विद्या दान महादान जैसे संकल्प में कहीं न कहीं इनका योगदान रहा है। यह दान भी इनके खाते में पुण्य की तरह जुड़ गया। इसलिए दूसरा दरवाजा खुल गया।

तीसरा दरवाजा जब इन्द्र ने देखा कि यह कैसे खुला है? तब उस दरवाजे में बहुत सी बातें लिखी गई थी कि इन्होंने अमुक जगह अपने धन का भी दान दिया, किसी सेवा कार्य में सहयोग किया। रोटरी अन्तर्राष्ट्रीय जगत में जिस जिस काम में जितने जितने पैसे चाहिये थे उसमें भी इनका अंशदान था। इस तीसरे दरवाजे में भी इस रोटेरियन के पुण्य को इसके खाते में जोड़ा गया, इसलिए यह तीसरा दरवाजा भी खुल गया।

चौथे दरवाजे पर आकर जब इन्द्र ने फिर अपने मॉनीटर को चैक किया जो यह पता चला कि यह दरवाजा बड़ी मुश्किल से खुलता है। तो फिर यह कैसे खुला? इस व्यक्ति ने ऐसा क्या पुण्य का कार्य किया? तब पता पड़ा कि विकलांगों की सहायता के लिए जो कुछ भी बन पड़ता था उनके लिए रहने की जगह, उनके सोने के लिए बिस्तर या सर के ऊपर छत हो, ऐसे अनेक प्रयत्न इस रोटेरियन साथी ने किए हैं, इसलिए वह चौथा दरवाजा भी अपने आप खुल गया।

पाँचवे दरवाजे तक पहुँचते पहुँचते इन्द्र का माथा भी ठनका कि इस व्यक्ति इतने-इतने काम सब जीवन का आनन्द लेते हुए भी कैसे कर लिये। यह तो पैसे वाला सक्षम आदमी है, मौज-मजे करने वाला आदमी है फिर कैसे स्वर्ग के दरवाजे पर पहुँचा है? यह विचार करते हुए जब पाँचवे दरवाजे पर देखा तो इन्द्र ने भी विचार किया कि इतना भी कोई कर सकता है? यह महसूस किया कि पीडि़त मानवता की सेवा के लिए, कहीं बिमार व्यक्तियों के लिए चिकित्सा शिविर का आयोजन जगह-जगह जब गाँवों में जाकर किया गया तब इस व्यक्ति ने अपने सेवाएँ दी थी। यह पेशे से कोई डॉक्टर है जिसने नि:शुल्क दवाईयाँ दी। वहाँ दवा वितरित करने में अपना योगदान दिया था। उस गरीब व्यक्ति को जिसके आँसू पोछने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए था वह व्यक्ति ज्यादा कुछ न भी कर पाया तो भी उनसे बात कर उनको इस बात का एहसास दिया कि हम तुम्हारे साथ हैं।

छठे दरवाजे पर जब वह पहुँचा तब उसने देखा कि इसका ऐसा कौनसा काम है जिससे इस व्यक्ति के लिए यह छठा दरवाजा भी खुल गया? इन्द्र ने देखा तब पता चला कि न सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा के लिए काम किया वरन् अस्पतालों में जाकर बड़ी से बड़ी मशीनें, यहाँ तक कि आईसीयू ऑन व्हील्स और न जाने ऐसी कईं सारी मशीनें जो बिमारियों के ईलाज के लिए आवश्यक होती हैं, वह सब इन रोटेरियन साथियों ने अपने पैसे से योगदान कर के दी। एम्बुलेन्स से लेकर तथा कहीं तो पूरे हॉल की स्थापना रोटरी क्लब ने की तो निश्चित रूप से यह स्वर्ग के छठे दरवाजे तक आने लायक है।

सातवें दरवाजा बड़ा आश्चर्यजनक था क्योंकि यह तो ऐसा अद्भुत काम है, सातवाँ दरवाजा कैसे खुल सकता है? ऐसे काम तो अनेक संस्थाएँ करती हैं लेकिन ऐसा क्या कारण है एम्बुलेन्स से लेकर तथा कहीं तो पूरे हॉल की स्थापना रोटरी क्लब ने की तो निश्चित रूप से यह स्वर्ग के छठे दरवाजे तक आने लायक है।

सातवें दरवाजा बड़ा आश्चर्यजनक था क्योंकि यह तो ऐसा अद्भुत काम है, सातवाँ दरवाजा कैसे खुल सकता है? ऐसे काम तो अनेक संस्थाएँ करती हैं लेकिन ऐसा क्या कारण है  कि यहाँ सातवाँ दरवाजा भी खुल गया? तब पता चला सातवे दरवाजे को उस स्क्रीन पर जब इन्द्र ने देखा तो देखा कि ये वो रोटेरियन साथी हैं जिन्होंने नारी के सम्मान के लिए अनेक काम किए, महिलाओं के उन्नयन के लिए कन्या भू्रण हत्या जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिए इन्होंने अपना योगदान दिया है। इसीलिए यह सातवा दरवाजा खुला है। ݍݍयत्र पूजयन्ते नारी तत्र रमन्ते देवता’’।

तो रोटेरियन साथियों, देखा आपने! स्वर्ग के दरवाजे के यदि सात दरवाजों को पार करना है तो रोटरी के प्रत्येक काम में सहयोग प्रदान करते चले जाएँ। स्वर्ग के सातों दरवाजे आपके लिए सदा खुलेंगे।

मैं स्वर्ग की सैर करके लौट आया हूँ। इसे स्वर्गवासी न समझे केवल स्वर्ग की सैर के एक माध्यम इस स्वर्ग की सैर की साहि​ित्यक यात्रा इस कृ​ित के माध्यम से आप तक पहुँचा रहा हूँ।
आओ स्वर्ग की ओर एक कदम बढ़ायें.......

Alok School Students Two Days Tracking Tour at Sajjangarh Nature Park, Parshuram Mahadev - Ranakpur

आलोक सीनियर सैकण्डरी स्कूल, हिरण मगरी, उदयपुर
दो दिवसीय टे्रेकिंग कार्यक्रम सम्पन्न
प्रकृ​ित दर्शन से और पहाड़ो पर चढ़कर अभिभूत हुये छात्र

उदयपुर, 16 जनवरी।  आलोक स्कूल, हिरण मगरी सेक्टर - 11 के छात्र-छात्राओं द्वारा 2 दिवसीय वन भ्रमण (टे्रकिंग) कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। पहले दिन छात्र-छात्राओं ने सज्जनगढ़ अभ्यारण्य, सीसारमा के कालका माता मन्दिर तथा दूसरे दिन परशुराम महादेव रणकपुर में वन भ्रमण (टे्रकिंग) किया।
इस अवसर पर 320 छात्र-छात्राओं ने प्रकृ​ित को नजदीक से देखा एवं पहाड़ पर चढ़ाई की। इस वन भ्रमण छात्र-छात्राओं ने विभिन्न प्रजा​ितयों के पेड़, पौधों तथा प्राकृ​ितक दृश्यों को नज़दीकी से निहारा व इसके सम्बन्ध में अध्यापकों द्वारा जानकारी दी गई। 
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत ने छात्र, छात्राओं को वन भ्रमण कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रकृ​ित से प्रेमभाव रखने का आह्वान किया।
उप प्राचार्य ाशांक टांक ने बताया कि इस प्रकार के वनभ्रमण कार्यक्रमों से छात्रों में प्रकृ​ित के प्र​ित प्रेम जाग्रत होगा तथा वे विभिन्न वनस्प​ितयों, पेड़, पौधों के बारे में भी जानकारी ग्रहण कर सकें इस उद्देश्य से इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यालय द्वारा प्र​ितवर्ष आयोजित किए जाते हैं। 
इस अवसर पर ाारीरिक शिक्षक राजेश भारती, नवीन चौबीसा, दीपक चौबीसा, गुलजारीलाल नागदा, राजेश कुमावत, पायल कुमावत, मोहन नागदा, हेमेन्द्र सिंह चुण्डावत ने सहयोग दिया। 

Makar Sankrantie with Little Kids Alok School Udaipur




Ram Se Bada Naam - Rukmani Devi [Ramkatha Ki CD or DVD Distribution]

आलोक सीनियर सैकण्डरी स्कूल, हिरण मगरी, उदयपुर
राम से बड़ा राम का नाम - रूकमणी देवी
रामकथा की सीडी व डीवीडी का लोकार्पण

उदयपुर, 15 जनवरी। कलियुग में राम से बड़ा राम का नाम है केवल राम का नाम लेने से ही मनुष्य घोर कष्टों से मुक्ति पा जाता है ऐसा अद्भूत नाम है श्रीराम का। यह बात श्रीराम कथा की सीडी व डीवीडी का विमोचन करते हुये श्रीमती रूकमणी देवी ने आलोक संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम में कही।
उन्होंने कहा कि आज चारो तरफ सूचना और संचार क्रान्ति का विस्फोट हुआ है लेकिन रामकथा की प्रासंगिकता आज भी छात्रों में बनी हुई है। इस बात के लिये उन्होंने आलोक संस्थान का साधुवाद किया कि आलोक संस्थान में बालकों के संस्कार निर्माण हेतु ऐसे आयोजन किये जाते है। डॉ. प्रदीप कुमावत द्वारा नौ दिवसी रामकथा की विडियो सीडी व डीवीडी का लोकार्पण भी उनके हाथो किया गया। उन्होंने इस अवसर पर छात्रों को सम्बोधित करते हुये कहा कि अपने उद्ेश्यों की पू​िर्त के लिये सदैव हनुमान की तरह प्रयत्नशील होना चाहिये। 
डॉ. कुमावत ने इस अवसर पर कहा कि जहाँ कभी निराशा का भाव पैदा हो वहाँ आशा के बीज के रूप में रामकथा है। जीवन की प्रत्यक्ष समस्या का समाधान रामकथा में निहित है इसलिये मनुष्य को जीवन में हर बार समस्या से सामना हो उसे रामकथा की ओर ही उन्मुख होना चाहिये।
इस अवसर पर उप प्राचार्य ाशांक टांक ने कहा कि रामकथा में सभी कष्टों का निराकरण है। जो रामकथा में किसी कारण नहीं आ सके वे रामकथा की इस विडियो सीडी व डीवीडी के माध्यम से लाभ ले सकते है।



Alok School Swami Vivekanand Winter Festival [Ullas Mela]

आलोक सीनियर सैकण्डरी स्कूल
हिरण मगरी, सेक्टर-11 उदयपुर
आलोक संस्थान में विवेकानन्द विन्टर फेस्टिवल के अन्तर्गत उल्लास मेले’ में उमड़ी भीड़

लोगों ने उठाया मेले का लुत्फ, नृत्य की धूम
उदयपुर, 12 जनवरी। आलोक संस्थान, हिरण मगरी, सेक्टर-11 में विवेकानन्द विन्टर फेस्टिवल के अन्तर्गत उल्लास मेले का आयोजन यहां श्रीराम उद्यान में किया गया। मेले का विधिवत उद्घाटन संस्थान के चेयरमेन यामलाल कुमावत ने मौली बन्धन खोल कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमावत ने की। जबकि पवनपुत्र हनुमान प्रदर्शनी का उद्घाटन आलोक स्कूल, राजसमंद के प्रशासक मनोज कुमावत ने किया।
उक्त जानकारी देते हुए आलोक स्कूल, हिरण मगरी के उप प्राचार्य ाशांक टांक ने बताया कि वृहद स्तर पर आयोजित इस उल्लास मेले में हजारों की संख्या में लोग, अभिभावक व बच्चे उमड़े और उन्होंने मेले का आनन्द लिया।
इस अवसर पर नृत्य प्र​ितयोगिताओं का भी आयोजन किया गया। सायंकाल 4 बजे तक चले इस मेले में जहां एक ओर विवेकानन्द पर आधारित ݍउठो-जागो’ प्रदर्शन भी लगाई गई साथ ही पवनपुत्र हनुमान पर आधारित हनुमान चालीसा पर एक विशेष तेल चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। 
इस अवसर पर बच्चों ने चकरी, डॉलर, झूले और विभिन्न व्यंजनाें का स्वाद चखा तथा 60 से अधिक स्टॉल्स पर विभिन्न व्यंजनों का लोगों एवं बच्चों ने आनन्द लिया। 

Alok School Udaipur, Rajasthan 

  Alok School Udaipur, Rajasthan

  



Thursday, 9 January 2014

"Shrad Parv or Shradha"

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Aao Raas Rachaye............

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Deepawali Ese Manaye - Aao Asha Ke Deep Jalaye...............

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"Eshwarya, Bhog, Sukh or Anand"

Þ,s’o;Z] Hkksx] lq[k vkSj vkuUnÞ
Xkr fnuksa ge lcus vius&vius izfr”Bkuksa] ?kjksa esa y{eh iwtu fd;k gSA y{eh dks papyk ekuk gSA lkjs ,s’o;Z] Hkksx] lHkh dqN y{eh ij fuHkZj djrk gS gekjs }kjk vftZr fd, x, /ku ijA ;fn /ku u gks rks ftl oSHko dh] ,s’o;Z dh dYiuk ge djrs gSa og lkdkj :Ik ugha ys ldrhA blfy, vFkZ thou dk ,d egRoiw.kZ fo”k; gS vkSj vFkZ dh izkfIr gedks vius deZ ls feyrh gS vkSj deZ ds lkFk ;fn ek¡ y{eh dk vk’khokZn gesa feys rks gekjs /ku esa iw.kZr% o`f) gksdj ge ,s’o;Z vkSj Hkksx iw.kZ thou dks cM+s vkjke ls fcrk ldrs gSaA
Yksfdu D;k thou dk ,dek= y{; Hkksx] ,s’o;Z vkSj /ku dh izkfIr gh gS ;k blls ijs gSA gekjs Hkkjrh; euhf”k;ksa us vkuUn dh O;k[;k fcYdqy gVdj dh gS] mlesa /ku dk dgha mi;ksx vkuUn ds fy, ugha fd;k x;k gSA blfy, ;fn blds rhu fcUnqvksa dk /;ku ls ns[ksaA ,s’o;Z vkSj Hkksx rks vkidks <ax ls izkIr gks ldrk gS] ysfdu vkUkUn vkSj lq[k fcYdqy fHkUu ckr gSA ,d O;fDr cgqr vf/kd iSls okyk gksdj Hkksx vkSj ,s’o;Z ds lkjs lalk/ku tqVk ys] ysfdu mlds thou esa vkuUn gks] mlds thou esa lq[k gks] ;g vko’;d ugha gSA ysfdu ftlds ikl /ku ugha gS mlds ikl ,s’o;Z vkSj Hkksx fuf’pr :Ik ls ugha gksxk] ysfdu bl ,s’o;Z vkSj Hkksx ds vykok mlds ikl ,d lUrks”k ls Hkjk vkuUn gks ldrk gS] lq[k gks ldrk gS tks og vius Lo ds vUnj <w¡<+rk gSA vkSj ;gh thou dk ,d vfUre y{; gSA ;fn vki /ku ds ek/;e ls ,s’o;Z vkSj Hkksx izkIr djuk pkgrs gSa rks ;g vko’;d ugha fd og vkidks lq[k o ‘kkfUr Hkh iznku djsA
blfy, vDlj dj geus dbZa ckj vf/kd iSls okys dks vf/kd nq%[kh ns[kk gSA og ;g dgrs gq, ik;k x;k fd mlds thou esa lc dqN gS ysfdu lq[k o ‘kkfUr ugha gSA ;g ‘kkfUr vkSj lq[k gesa dgk¡ ls izkIr gks ldrk gS blds ckjs esa gedks iqu%fpUru djuk pkfg,A vkSj ;g fpUru djus ds fy, ,d gh fcUnq gS fd vki vius thou ls lUrq”V gSa\ vkSj thou dh ;g lUrqf”V D;k vkidks lq[k ns jgh gS\ oks dke tks dHkh vkius lksps gksaxs lius esa mudks djus esa dHkh vkidks lUrks”k dk vuqHko gksrk gS ;k dsoy iSlk dekus ls gh ;fn vkidks lq[k izkIr gks tkrk rks nqfu;k esa ftrus Hkh iSls okys yksx gS oks lHkh lq[kh vkSj vkUkUn ls ifjiw.kZ gksrsA ysfdu tks ftrus iSls okyk gS mYVs og T;knk nq%[kh ut+j vkrk gSA ;g dgrs gq, vDlj ge /kuk<; yksxksa dks ns[krs gSa fd esjs thou lc gS ysfdu ‘kkfUr ugha gSA lq[k dh ryk’k esa og ;gk¡&ogk¡] cM+s&cM+s xq#vksa ds ogk¡ n.Mor gksrk ns[kk tkrk gSA
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Rajneeti, Desh or Hum...............

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Editorial [Asahisnuta]

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/kS;Z] lfg”.kqrk] ‘kkafr] vafglk] lkSE;rk] fLFkjrk] larqyu tSls vusd thou ewY; rks ekuo esa vkt ds le; esa nqyZHk gks x;s gSA ftl rjg ls vkt gj {ks= esa vlfg”.kqrk ftls ge vaxzzsth esa Intolrance dgrs gS oks c<+rh tk jgh gSA mlls ,slk yxrk gS fd tSls /khjs&/khjs vlfg”.kqrk ls eu esa }s”k vkSj fQj nq’euh tUe ysrh gS mlls lEca/kks esa fxjkoV vkSj dVqrk dk fuekZ.k gks jgk gS og ge lc ds fy;s fopkjuh; gSA ekuo ekuo ds O;ogkj ls ,d nwljs ls fujUrj nwj gksrk tk jgk gSa
:l vkSj vesfjdk ‘kq: ls gh viuh vlfg”.kqrk ds dkj.k nqfu;k esa viuh /kkSal tek;s gq;s gSA ,d le; Fkk tc jf’;k us mldh /kkSal dks pqukSrh nh Fkh ysfdu ;w-,l-vkj-,- ds foHkktu ds ckn ,dek= vesfjdk us viuh nknkfxjh dk;e dh gqbZ gSA
vlfg”.kqrk dk ewy dkj.k D;k gS bl ij u tkdj eSa mu lUnHkkZsa ij ckr djuk pkgrk gw¡ fd orZeku jktuhfr ifjisz’; esa ftl rjg dh jktuhfrd vlfg”.kqrk gydks esa ns[kh tk jgh gS og jktuhfr ds gYdsiu dks gh n’kkZrh gSA ;fn jkgqy xka/kh dks e/;izns’k esa dqN Hkh cksyus ij dV?kjs esa [kM+k fd;k tkrk gS ogha pquko fpUg dks ysdj eksnh ds f[kykQ dkaxzsl izfrfØ;k Lo:i pquko vk;ksx dks f’kdk;r ntZ djkrk gSA vlfg”.kqrk dh Js.kh esa gh vkrk gSA
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vkt dh rkjh[k esa uSfrdrk dh nqgkbZ nsus okys ;|fi cgqr de yksx fn[kkbZ nsrs gS ysfdu fdlh Hkh O;fDr ij vuSfrd vkpj.k dk ykaNu yxk dV?kjs esa [kM+k dj nsuk vfr lkekU; ckr gSA muds pfj= ij vaxqyh mBkdj muds pfj= ij fdpM+ mNky nsuk rks ekuks vkt gj fdlh dk pyrs&fQjrs ‘kxy gks x;k gSA ,sls esa tc ge ,slh fo”ke ;k foifjr ifjfLFkfr;kas ds chp esa lekt ls vPNs gksus dh vis{kk djsaxs rks oks dSls lEHko gksxkA fQj ge dgs fd izfrfØ;koknh jktuhfr mfpr ugha gS] jktuhfr esa tks izfrfØ;k gS oks rks Vhoh pSuyksa ds ek/;e ls lgt fn[k tkrh gSA ysfdu dHkh vkius ;g lkspk gS fd izfrfØ;k ge vius n¶rjksa] vius dk;Z{ks=] viuh nqdkuksa] viuh QSfDVª;ksa] lM+d ij pyrs oDr ,d eksVj lkbZfdy lokj Hkh gekjs vkxs vkdj csrjrhc <ax ls xkM+h pykrk gS rks ge mldks Xykl foaMks [kksydj cqjk Hkyk dgrs gS rks oks Hkh gesa pkj xkyh nsus dks rS;kj gks tkrk gS vkSj dHkh vkius xkM+h jksd nh rks og vkils dq’rh yM+us ds fy;s Hkh rS;kj gks tkrk gSA
bl rjg dh tks Intolerance lekt esa iSnk gqbZ vkf[kj buds dkj.k D;k gS\ vkt D;ksa ugha O;fDr nwljksa dh ckr lquus ds fy;s rS;kj gS\ og D;kas ugha vius vUnj dh {kerk dks fodflr dj ik jgk gS\ mldk dkj.k vkt dh O;oLFkk gSA nkSM+&Hkkx Hkjh ftUnxh ds lkFk O;fDr ds vga brus egÙoiw.kZ gks x;s fd fdlh nwljs dks cnkZLr gh ugha djuk pkgrsA blfy;s tgk¡ vga ds Vdjkus dh ckr gS oks fcYdqy fHkUu gS ysfdu izfrfØ;koknh gksuk Intolerate gksuk ;g vlfg”.kqrk lekt ds gj {ks= esa xyh] eksgYysa] pkSjkgs] lekjksg] ‘kknh] ?kj] vkaxu] n¶rj lc txg fn[k jgh gSA
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;fn vkidk dksbZ mikgkl Hkh Hkjh lHkk esa djrk gS rks mls lgu djuk vkuk pkfg;sA ml ij izfrfØ;k u djrs gq;s ml ckr dks Vky nsaxs vkSj mls vdsys esa dgsaxs fd bl rjg ds vkidks ;gk¡ ugha cksyuk pkfg;s rks ‘kk;n mlds eu esa vkids izfr lEeku vkSj c<+sxkA ;fn vkius izfrfØ;k dj nh rks oks vkSj ,sls ekSds ryk’k djsxk fd eq>s dc vkSj ekSdk fey vkSj eSa dc ml izfrfØ;k dk nwljs fljs ls tokc ns ldwA
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lEiknd


Editorial [HUm Ji Rahe Hai.................]

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       blfy;s vUrksxRok Hkksx ds ek/;e ls ;ksx dh vksj mueq[k gks tkuk gh thou dk ,d vfUre y{; gS vkSj tks thou ds bl eeZ dks tku tkrk gS rks og Hkkjrh; laLd`fr dks Hkh tku tkrk gSA blfy;s lE;d Hkksx ls lE;d ;ksx dh vksj c<+ lds ;gha jksVjh lkfFk;ksa ls esjk fuosnu gS ;g fpUru FkksM+k xw< t:j gS ysfdu vki lcds le> esa vk;sxk blh n`f”V ls eSaus ;g lEikndh; FkksM+k ijs gVdj fy[kk gSA eq>s vkids fopkjksa dh tkudkjh feyus ij feyrh jgrh gS ysfdu eS pkgrk gw¡ fd bZesy ds ek/;e ls] ,l-,e-,l- ds ek/;e ls Hkh vius fopkjksa ds ckjs esa voxr djk,axs rks eq> vPNk yxsxkA

MkW- iznhi dqekor

lEiknd

Editorial [Sachin - Bharat Ratn or Rajniti ]

lfpu&Hkkjr jRu vkSj jktuhfr
       xr fnuksa ns’k ds loZdkfyu egku~ fØdsVj lfpu rsanqydj dks Hkkjr jRu nsus dh ?kks”k.kk dh x;hA mlls igys lfpu rsanqydj dks Hkkjr jRu nsus ds fy;s [ksy foHkkx ls ysdj daVªksy cksMZ ls ysdj vusd iwoZ f[kykfM+;ksa rd us bl csrkt ckn’kkg dks Hkkjr jRu nsus dh flQkfj’k dhA cgqr vPNh ckr gS fdlh [ksy ds fy;s Hkkjr jRu nsus dh ?kks”k.kk Hkkjr ljdkj us dh gSA ysfdu cgqr gh vPNk gksrk ;fn Hkkjr jRu lfpu rsanqydj ds lkFk ej.kksijkUr fnoaxr /;ku pan dks Hkh ;g lEeku iznku fd;k tkrk rks cgqr vf/kd csgrj gksrkA
gekjs ns’k esa vPNs dke ds lkFk&lkFk fuank lcls igys ‘kq: gks tkrh gSA fuank Lrqfr bl ;qx dk /keZ cudj jg x;k gS ,slk izrhr gksrk gSA D;ksafd Hkkjr jRu tSls fufoZokn vyadj.k dks Hkh ns’k ds usrkvksa us bruk dyqf”kr dj fn;k gS mlls dHkh&dHkh vkRek vkgr gksrh gSA gekjh Loj dksfdyk ftls lkjh nqfu;k esa ,d vyx izfr”Bk gS ,slh Hkkjr jRu yrk eaxs’kdj th dks gekjs ukxfjd mM~;u ea=h izQqYy iVsy us ftl rjg ls viuh izfrfØ;k O;Dr dh mlls rks ,slk yxrk gS fd cM+ks dk lEeku dk ewY; vc cpk Hkh gS ;k ughaA
yrk eaxs’kdj us ujsUnz eksnh ds iz/kkuea=h cuus dh ckr D;k dg nh izQqYy iVsy vkx&ccwyk gksdj ;g cksyus yxs fd ftlus ;g cksyk mudh cqf) Hkz”V gSA blls T;knk ‘keZukd fVIi.kh eSa ugha le>rk fd yrk eaxs’kdj th tSlh egku~ dykdkj dks dksbZ le>nkj O;fDr ns ldrk gSA ;g rks turk dks r; djuk gS fd cqf) fdldh Hkz”V gS vkSj dkSu fdruk Hkz”V gS ;g fdlh ls fNik gqvk ugha gSA ysfdu ftl rjg ls lfpu rsanqydj dks Hkkjr jRu feyus ds ckn dbZ rjg ls vyx&vyx vkokts mBhA tokc Hkh gedksa ugha lfpu rsanqydj dks Lo;a nsus gSA
dbZ yksxksa us loky mBk;k fd Ms<+ gtkj djksM+ ds lfpu us dksbZ eqDr esa fØdsV ugha [ksyhA mUgksaus bl ckr ds fy;s th Hkjdj iSLk fy;k vkSj mUgksaus cVksjk Hkh gS oks dSls HkkjRk jRu gq;sA ;s mudh viuh lksp gks ldrh gSA dqN gn rd dqN yksx blls lger Hkh gks ldrs gS ysfdu esjk Lo;a ekuuk gS fd lfpu us fØdsV ds ek/;e ls gh lgh iwjs fo’o esa vius uke dk Madk ctkdj fØdsV txr esa vUrjkZ”Vªh; Lrj ij Hkkjr dks igpku fnykbZ gS blfy;s mUgsa Hkkjr jRu ekuuk dksbZ vfr’k;ksfDr ckr ugha gksxhA ysfdu ftl rjg ls chp&chp esa dqN fooknksa esa lfpu rsanqydj Hkh jgs gS fo’ks”kdj mudh Qjkjh dks ysdj bude VsDl dks ysdj ftl rjg dh ckrs gqbZ bl rjg dh leL;k ls tks fookn cus baiksVZ M~;wVh esa NwV ds fy;s mUgksaus ftl rjg ls vkosnu fd;k] viuh dksguh ds bZykt ds fyls ch-lh-lh-vkbZ ls iSls ekaxs mudh bl ekufldrk ls irk pyrk gS ysfdu vc Hkkjr jRu izkIr gks pwdk gS ge muds vkxs ur eLrd gSA os lpewp Hkkjr jRu gSA NksVh&eksVh bl rjg dh ckrs gksrh gS ysfdu jktuhfrK ftl rjg ls gekjs ns’k ds bu egku~ yksxksa dk vieku viuh fVIi.kh;ksa ls djrs jgrs gS mlls mUgha ds psgjs ij Fkwd fxjrh gSA tSls lwjt ij dksbZ Fkwds og mUgha ij vkdj fxjrh gSA
ge lc feydj jksVjh ds eap ls gh egku~ oSKkfud lh-,u- vkj- jko dks Hkh ftl rjg ls HkkjRk jRu fn;k x;k oks fuf’pr :i ls foKku dh izxfr esa cgqr lgk;rk djsxkA nq[k bl ckr dk gS fd jktuhfr ds /kqja/kj ekus tkus okys vVy fcgkjh oktis;h us gh ej.kksijkUr jktho xka/kh dks HkkjRk jRu nsus dh flQkfj’k dh Fkh ysfdu ljdkj oktis;h dks Hkkjr jRu nsus esa D;ksa fgpfdpk jgh gSA pkgs ikfdLrku ls laf/k dh ckr gks ;k iks[kj.k ls iwjh nqfu;k esa viuh /kkd tekus dh ckr gks ;k la;qDr jk”Vª la?k esa fgUnh esa Hkk”k.k nsus dh ckr gks vFkok bl ns’k dh yksdlHkk esa viuh xtZuk ls lkjs yksxksa ds chp eas viuh ckr dks izHkkoh <ax ls j[kus dh ckr gks ;k thou i;ZUr ,d vkn’kZ usr`Ro iznku djus dh ckr gks ;k Lo.kZ prqHkZqt ;kstuk tks vkt iwjs ns’k esa QkWjysu  dk lM+d ifjogu dk tky fcNk;k gS oks ekuuh; vVy fcgkjh oktis;h fuf’pr :i ls ;qx iq:”k gSA mu ;qx iq:”k dks ;fn Hkkjr jRu nsus esa ;fn ljdkj fgpfdpk gh lgh jgh gS rks Hkys gh fgpfdpk;s yksxksa us rks mUgsa Hkkjr jRu eku fy;k gSA dkaxzsl dks mnkj gksdj vVy fcgkjh oktis;h dks lEekfur djuk gh pkfg;sA
eSa fdlh ny fo’ks”k ds nyny esa u Ql dj eSa mu izfrHkk dks fny ls lEekfur djrk gw¡ lfpu rsanqydj] jko lkgc lfgr eSa jksVjh ds bl eap ls ;gha vis{kk djrk gw¡ fd ns’k esa ,sls vusd Hkkjr jRu iSnk gks] gj cPpk ,d jRu dh rjg pedrk gqvk vkxs c<+s vkSj bl ns’k ds uke dks xkSjokfUr djsA

MkW- iznhi dqekor

lEiknd

Editorial Do Din Ka Mela - Chala Chali Ka Khel

nks fnu dk esyk&pyk pyh dk [ksyk
vki lksp jgs gksaxs fd esyk rks rhu fnu dk Fkk vkSj ;s nks fnu ds esys dh ckr dSls dg jgs gSa\
jksVsfj;u lkfFk;ksa! jksVjh dk esyk rks rhu fnu dk Fkk ysfdu eSa ftl esys dh ckr dj jgk gw¡&thou dk tks esyk gS ;s rks nks fnu dk gh esyk gSA nks fnu dk esyk! vki dgsaxs thou esa rks dksbZ 80 o”kZ] dksbZ 90 o”kZ rd thrk gS] fQj ;g thou 2 fnu dk esyk dSls gS\ vxj lksp dks FkksM+k lk vkxs dh vksj ysdj tk,¡ rks dsoy vkids fy, yksx bdV~Bs rc gksaxs ‘kk;n tc gesa pkj da/kksa ij yksx mBkdj ys tk,¡xs vkSj ,d ckj rc bdV~Bs gq, gksaxs tc geus tUe fy;k gksxk rc vkuUn ls lkjs ?kj esa [kqf’k;ksa dk okrkoj.k jgk gksxkA tc vk, Fks rks ge jks, Fks vkSj tc ge tk,¡xs rks yksx gekjs fy, jks,¡A ,sls dqN deZ djds tk,¡A fdlh dfo us [kwc dgk gS fd ^^thou nks fnu dk esyk] pyk pyh dk [ksykA** bl esys esa dksbZ O;fDr igys vkdj pyk x;kA dksbZ gels ckn esa tk,xk] dksbZ mlds ckn esa tk,xk ysfdu tkuk rks lcdks gSA
thouHkj ge tksM+rs jgrs gSa vkSj ml tksM+rksM+ dk fglkc fcBkus ds ckn vkt rd ,d Hkh O;fDr ,slk ugha feyk tks ;g dg lds fd thou esa eSaus tks dqN Hkh lap; fd;k] HkkSfrd lq[k&lqfo/kk,¡ bdV~Bh dh mls eSa lkFk ysdj tkÅ¡xkA fldUnj us Bhd gh dgk Fkk fd tc eSa e:¡ rks esjs rkcwr esa ls esjs nksuksa gkFk ckgj yVdk nsukA rks yksxksa us dgk fd ;g vt+hc ugha yxsxk\ fldUnj us dgk fd gk¡] vt+hc rks yxsxkA bu yksxksa dks irk pyuk pkfg, fd tks fldUnj fo’ofot; ij fudyk Fkk oks [kkyh gkFk gh vk;k Fkk vkSj tc fo’o fot; ds vfHk;ku ij fudyus ds ckotwn Hkh tc oks nqfu;k ls tk jgk gS rks [kkyh gkFk gh tk jgk gSA thou dk lR; blh esa fNik gqvk gS fd ge [kkyh gkFk vk, Fks vkSj [kkyh gkFk gh tk jgs gSaA ysfdu ge [kkyh gkFk ugha TkkrsA ‘kk;n ge fdlh ckr dks dgrs gSa fd jke ls cM+k jke dk uke( jke dk uke jke ls dSls cM+k gks x;k\ ;g dHkh vkius fopkj fd;k\ jke vius thoudky esa ftrus le; jgs mrus jgsA tc os czãyksd pys x, rc muds tks ihNs jg x;k og mudk uke gh jg x;kA vkSj oks uke Hkh muds }kjk fd, x, dk;ksZa dh otg ls mudk uke txr esa bZ’oj ds :Ik esa LFkkfir gks x;kA ;kfu uke lnSo O;fDr ls cM+k gks tkrk gS ;fn O;fDr ds deZ cM+s gksaA ysfdu ;fn O;fDr ds deZ cM+s u gksa] rks uke dqN Hkh j[k yhft, O;fDr ds LFkwy ‘kjhj ds lekiu ds lkFk gh O;fDr dk uke Hkh frjksfgr gks tkrk gSA
vki vkSj ge ek= ‘kjhj gSa] ,slk Hkze Hkh gedks ugha ikyuk pkfg,A bl vkRek dks nsg :Ik esa ;g ‘kjhj izkIr gqvk gSA bl nsg ls bZ’oj dh izkfIr Hkh dh tk ldrh gS vkSj deksZa ds ek/;e ls l`f”V ds ml ije rRo dks tkuus dk lkSHkkX; bl ‘kjhj ds ek/;e ls fey ldrk gSA rks D;ksa ugha bl ‘kjhj dks vPNs dk;ksZa esa yxkdj gekjs ekrk&firk us tks bl ‘kjhj dks uke fn;k ml uke dks ge lkFkZd dj tk,¡ vkSj gekjs tkus ds ckn Hkh gekjk uke yksx lEeku ds lkFk ys ldsa vkSj ge Hkh dg ldsa fd gekjk uke gekjs dke ls cM+k gks x;kA geus vius deksZa ls gekjs uke dks cM+k dj fn;kA ;g vuqHkwfr tc O;fDr ds vUnj iui tkrh gS rks O;fDr Js”Brk dh vksj Lor% c<+ tkrk gSA thou lpeqp esyk gh rks gSA dbZa yksx feyrs gSa] ifjtu feyrs gSaA bl esys esa ge ‘kknh djrs gSa] cPps iSnk gksrs gSa] muds Hkh cPps gksrs gSaA ;g lc gksrk gS] ;g Øe pyrk gSA nqfu;k esa tks Hkh deZ ge djrs gSa] tks fu;fr us gekjs fy, fy[kk gS] oks lkjs deZ djus ds ckn ,d fnu og lc NksM+dj ge iqu% ogha izLFkku dj tkrs gSaA ‘kk;j dh bu iafDr;ksa dks fQj rhu fnu ds jksVjh esys ds lQy vk;kstu ds Ik’pkr~ ;gh dgk tk ldrk gS fd ^^thou nks fnu dk esyk&pyk pyh dk [ksyk**A dbZa igys pys x,] dqN ckn esa tk,¡xsA eSa Hkh tkÅ¡xk vki Hkh tk,¡xs] lc tk,¡xs( QdZ bruk gksxk fd geus vius thou dks dSls th;k\ thou fdruk yEck Fkk ;g egRoiw.kZ ugha gS thou dSls th;k x;k ;g egRoiw.kZ gSA
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MkW- iznhi dqekor
lEiknd


"Rasik Baniye......."


SMS of the week

SMS of the week….

vkidk thou vkidk gS] ij oks lekt ds dke ugha vk;k rks flQZ vkidk gh gksdj lekIr gks tk,xk A lekt ds Hkh dke vk;k rks ej ds Hkh vkidk uke vej gks tk,xkA

Thinking of People

Dr. Pradeep Kumawat Udaipur, Rajasthan, India
lEikndh; %
,d vaxqyh] rhu vaxqfy;ka
lkfFk;ksa]
       tc ge ,d vaxqyh fdlh dh rjQ djrs gS rks og vius vUnj ds vgadkj dks LFkwy :i esa gh mls nwljs dh vksj mBkrs gSA og vaxqyh ftl vksj dh tkrh gS mls viekfur djus ;k mls izrkfM+r djus ds fy;s mBrh gSA dHkh vkius fopkj fd;k gS ,d vaxqyh lkeus dh vksj rks rhu vaxqyh viuh rjQ gksrh gSA vf/kdrj yksx cksy Hkh nsrs gS fd ,d esjh vksj gS rks rhu rsjh vksj gSA ysfdu dHkh ;g tkuus dk iz;kl ugha fd;k fd ;g ,d vaxqyh vkSj rhu vaxqyh dk ladsr D;k gS\
       vkbZ;s eSa ,d fopkj nsrk gw¡ ge bls le>s vkSj xgjs mrjsA ge ekyk tirs gS vkSj tc ;g tks rtZuh vaxqyh gS mls lh/kh j[krs gS vkSj ekyk ls ugha Nwvkrs gS ;kfu bZ'oj dh miklu djuh gS rks vius vgadkj dks nwj j[kuk gksrk gSA vgadkj xzLr gksdj ekyk Qsjh rks ml ti dk dksbZ egÙo ughaA Bhd oSls gh rhu vaxqfy;k¡ viuh vksj j[krs gS rks rhu vaxqfy;k¡ dk eryc ;g gS tks vaxqfy;k¡ vgadkj ds fy;s mBkbZ gS mleas ls igyh vaxqyh gS eulk] nwljh gS okpk vkSj rhljh vaxqyh gS deZ.kkA eulk % vFkkZr~ tks vkjksi vki vgadkj ls xzLr gksdj yxk jgs gS D;k vkidk eu Hkh mls Lohdkj djrk gS\ D;k oks eu ls lR; gS\ tSlk jksVjh esa QkWjosVsLV gS oSlk gS ;g Fkzhos VsLV gSA okpk % nwljh vaxqyh D;k vki vgadkj ls bl ckr  dks mBk jgs gS ;k vki fdlh dk vieku dj jgs gS mls izek.k lfgr dgus dk lkgl j[krs gSA okpk ;kfu vki vius opu ij ifjiw.kZ gS fd vkius thou esa dHkh vlR; ugha cksykA lR; ds vk/kkj ij nwljksa dk vieku djus dk vki esa uSfrd lkgl gSA deZ.kk%  D;k gekjs deZ brus ifo= gS nwljksa ds dekZs dk iki vkSj iq.; dk QSlyk ysus ds vf/kdkjh gks tk;sA
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SMS of the Week

SMS of the week….

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MANAGEMENT FUNDA

MANAGEMENT FUNDA
Here are the 10 commandments that can probably help you to set right working culture-
Commandment-4
Celebrate every success. Reward it :
Pay people and they’ll be motivated; pay them more and they’ll be more motivated; it is a common myth about the workplace. How something so obvious can be so wrong-Funny, isn’t it?
Study after study shows that fair pay is important as a motivating tool, but beyond that there are several other factors as important as money. Few amongst them are good treatment, assurance of security and safety, opportunities for advancement, and last but not the least, recognition for achievements.
Commandment-5
Clean up your mess :
Mistakes are bound to happen. Be it missing deadlines or disappointing people. You’ll mess up in a hundred different ways.
Knowling that, it is critical to maintain a motivated team, it is essential to possess the ability to clean up your mess. Acknowledge that the results are not okay then make a commitment to put things right and prevent a repetition.
Commandment-6
Make use of powerful and positive languages
            Nothing can be less motivating than vague instructions and an unclear sense of where we’re heading and why? Just like people say cleanliness is next to godliness, in an organization, clarity is even closer.

            Saying what you mean, clearly, powerfully, and positively, can motivate your employee incredibly. For, people know what is expected out of them and why. So, take a moment before you make an announcement to choose language that clarifies instead of messing up things.

Cultural Shlok

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